रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य कर (GST) विभाग में वर्ष 2022 में आयोजित सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा को निरस्त किए जाने के बाद अब इस मामले पर सियासत भी तेज हो गई है। विभागीय जांच में परीक्षा प्रक्रिया और चयन से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आने के बाद पूरी परीक्षा और उसके आधार पर हुई चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। इस फैसले के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सरकार की कार्रवाई को जीरो टॉलरेंस की नीति से जोड़ा, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के कदम पर सवाल उठाए हैं।
2022 की परीक्षा और नियुक्तियां निरस्त
राज्य कर विभाग ने लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा को शून्य घोषित कर दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 26 जून 2022 को परीक्षा आयोजित की गई थी और इसके आधार पर चयनित कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था।
विभागीय जांच में परीक्षा के दौरान आरक्षण रोस्टर, परीक्षार्थियों की उपस्थिति, अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की कोडिंग और पुनर्मूल्यांकन समेत कई प्रक्रियाओं में अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। जांच में कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर मिलने की बात भी सामने आई।
इन परिस्थितियों में विभाग ने पूरी परीक्षा और उसके आधार पर हुई चयन प्रक्रिया को निरस्त करने का फैसला लिया। परीक्षा के जरिए वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने प्रभावित कर्मचारियों को उनके मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस भेजने का आदेश दिया गया है। राज्य कर आयुक्त की ओर से यह आदेश 11 सितंबर 2026 को जारी किया गया था।
अरुण साव बोले- जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई होगी
परीक्षा निरस्त किए जाने के फैसले पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सरकार की नीति का हवाला देते हुए कहा कि जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं और आम लोगों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है।
अरुण साव ने इस मामले को पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जोड़ते हुए भी आरोप लगाए और कहा कि यदि प्रक्रिया में अनियमितता हुई है तो उस पर कार्रवाई जरूरी है। हालांकि, पिछली सरकार से जुड़े उनके राजनीतिक आरोप उनके बयान का हिस्सा हैं।
दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा को शून्य घोषित करना या जांच कराना सरकार का निर्णय है। यदि प्रमोशन की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो सरकार उसकी जांच कर सकती है।
बैज ने इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जुड़े विवादों से भी जोड़ते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि PSC से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार हुआ है और इंटरव्यू स्थगित किए जाने से भी कई सवाल उठते हैं।
दीपक बैज ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह अपनी कथित नाकामियों को छिपाने के लिए पुराने मामलों को अब सामने ला रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जांच करना चाहती है तो जांच कर सकती है और कांग्रेस को इससे कोई आपत्ति नहीं है।
जांच रिपोर्ट में सामने आईं कई प्रक्रियागत खामियां
विभागीय जांच से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया में केवल एक स्तर पर नहीं बल्कि कई चरणों में खामियां सामने आईं। इनमें आरक्षण रोस्टर तैयार करने, परीक्षा में उपस्थित अभ्यर्थियों का रिकॉर्ड, समेकित परिणाम और अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की पहचान छिपाने के लिए कोडिंग तथा पुनर्मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
जांच में उत्तर-पुस्तिकाओं में समान उत्तर मिलने की बात भी सामने आई। विभाग ने इन अनियमितताओं को व्यापक मानते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त किया, क्योंकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष रूप से यह तय करना मुश्किल माना गया कि किन अभ्यर्थियों का चयन योग्यता के आधार पर हुआ और किन्हें अनियमितताओं का लाभ मिला।
42 कर्मचारियों पर पड़ा असर
इस कार्रवाई का असर वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त किए गए 42 कर्मचारियों पर पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, चयन प्रक्रिया निरस्त होने के बाद इन कर्मचारियों को उनके मूल लिपिक पद पर वापस भेजा जाएगा।
GST विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा भी बन गया है। एक तरफ सरकार इसे अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई और जीरो टॉलरेंस नीति बता रही है, वहीं कांग्रेस इस कार्रवाई के समय और सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रही है।
