Tuesday, October 13, 2026

दुर्ग में तहसीलदार बनकर साइबर ठगी: स्वास्थ्यकर्मी को नौकरी से निकालने की धमकी खाते से उड़ाए 1.49 लाख रुपये

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दुर्ग। CG News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक साइबर ठग ने खुद को कलेक्ट्रेट का तहसीलदार बताकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने जाल में फंसा लिया। आरोपी ने पहले विभागीय अधिकारियों से कर्मचारियों के मोबाइल नंबर हासिल किए और फिर फर्जी सरकारी निर्देश के जरिए अपना भरोसा कायम किया। इसके बाद एक स्वास्थ्यकर्मी को नौकरी से निकालने की धमकी देकर उसके बैंक खाते से करीब 1 लाख 49 हजार रुपये निकाल लिए गए।

मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। पीड़ित स्वास्थ्यकर्मी ने पुलिस से शिकायत की है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

तहसीलदार बनकर अधिकारियों को किया फोन

जानकारी के मुताबिक, साइबर ठग ने खुद को कलेक्ट्रेट का तहसीलदार और वरिष्ठ अधिकारी बताकर धमधा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। उसने पहले बीएमओ और बीपीएम से बातचीत कर विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों के मोबाइल नंबर हासिल किए।

वरिष्ठ अधिकारी समझकर विभागीय कर्मचारियों ने आरोपी के साथ जानकारी साझा कर दी। इसके बाद ठग ने स्वास्थ्य विभाग के ग्रुप में एक फर्जी निर्देश भी प्रसारित करवाया। इस तरीके से उसने कर्मचारियों के बीच अपनी पहचान को लेकर भरोसा पैदा करने की कोशिश की।

फर्जी निर्देश के बाद कर्मचारियों को बनाया निशाना

आरोपी ने विभागीय ग्रुप में फर्जी संदेश प्रसारित करवाने के बाद एक-एक कर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से संपर्क करना शुरू किया। वह खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर सरकारी कामकाज और कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी मांगता था।

इसी दौरान उसने आरएचओ योगेश से भी संपर्क किया। आरोपी ने खुद को अधिकारी बताते हुए योगेश को नौकरी से निकालने की धमकी दी। धमकी और दबाव के कारण योगेश उसके झांसे में आ गया।

UPI और SBI YONO की गोपनीय जानकारी लेकर निकाले पैसे

आरोप है कि साइबर ठग ने दबाव बनाकर योगेश से UPI और SBI YONO से संबंधित गोपनीय जानकारी और पासवर्ड हासिल कर लिए। इसके बाद आरोपी ने उनके बैंक खाते से अलग-अलग लेनदेन के जरिए करीब 1.49 लाख रुपये निकाल लिए।

खाते से रकम निकलने के बाद स्वास्थ्यकर्मी को साइबर ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खाते और लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं और आरोपी ने विभागीय कर्मचारियों की जानकारी किस तरह हासिल की।

यह मामला साइबर ठगों के उस तरीके को भी सामने लाता है, जिसमें वे सरकारी अधिकारी बनकर लोगों पर दबाव बनाते हैं और उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करते हैं। किसी भी अधिकारी के नाम से फोन आने पर बिना सत्यापन के पासवर्ड, OTP, UPI PIN या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

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