जगदलपुर/रायपुर, 5 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी कांड मामले में आज बड़ा फैसला आने की उम्मीद है। एनआईए की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। पहले भी निर्णय की तारीख आगे बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में अब अदालत के फैसले पर बस्तर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ की नजरें टिकी हुई हैं।
झीरम घाटी में हुए इस नक्सली हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था। अब आज आने वाले निर्णय से मामले में आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
टीएस सिंहदेव ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
फैसले से पहले पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने झीरम घाटी घटना से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए उस समय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान मौके पर वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी वह नहीं बता सकते, लेकिन घटना से संबंधित अपनी जानकारी उन्होंने अदालत के सामने दर्ज कराई है।
सिंहदेव के मुताबिक, जिस स्थान पर ब्लास्ट हुआ था, उनकी गाड़ी वहां से करीब पांच मिनट पहले ही गुजर चुकी थी। उन्होंने अदालत के समक्ष घटना से जुड़ी कई जानकारियां साझा करने की बात कही।
लाल साड़ी पहने महिला और पिकअप वाहन का किया जिक्र
टीएस सिंहदेव ने बताया कि घटनास्थल के पास उन्हें लाल साड़ी पहने एक महिला बैठी दिखाई दी थी। वहां एक पिकअप वाहन भी खड़ा था। उनके अनुसार, कुछ आगे जाने के बाद रुमाल बांधे हुए कुछ मोटरसाइकिल सवार लोगों को आते हुए देखा गया था।
सिंहदेव ने कहा कि घटना से पहले और उसके आसपास उन्होंने जो कुछ देखा था, उसकी जानकारी उन्होंने अदालत के सामने रखी है। हालांकि इन बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुरक्षा इनपुट के बावजूद सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी पर सवाल
सिंहदेव ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जगदलपुर से सुकमा की ओर जाते समय प्रभावित क्षेत्र में उन्हें कोई सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आया था। उनका सवाल है कि जब इलाके में सुरक्षा को लेकर इनपुट मौजूद था, तो वहां पर्याप्त सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं थे।
उन्होंने दावा किया कि आईबी की ओर से इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी को लेकर लिखित जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कथित कमी क्यों रही, यह गंभीर सवाल है।
नेताओं के काफिले की जानकारी होने का किया दावा
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस की ओर से डीजीपी से लेकर एसपी स्तर तक यह जानकारी दी गई थी कि नेताओं का काफिला संबंधित क्षेत्र से होकर गुजरने वाला है। ऐसे में बड़ी संख्या में नेताओं के वहां से गुजरने की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई, इस पर उन्होंने सवाल उठाया।
अब इन सभी सवालों के बीच आज एनआईए की विशेष अदालत के फैसले का इंतजार है। अदालत के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि झीरम घाटी कांड के इस लंबे समय से चले आ रहे मामले में न्यायिक निष्कर्ष क्या सामने आता है। फैसले को लेकर बस्तर के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ में लोगों की नजरें अदालत के निर्णय पर टिकी हुई हैं।
