Tuesday, August 25, 2026

झारखंड छात्र आंदोलन: ‘मेरी हालत गंभीर है, नहीं लगता ज्यादा दिन जिंदा रहूंगा’, भूख हड़ताल पर बैठे प्रेम नायक का भावुक बयान

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रांची: झारखंड में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में जारी धरने के बीच भूख हड़ताल पर बैठे छात्र प्रदर्शनकारी प्रेम नायक ने अपनी बिगड़ती तबीयत को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उनकी हालत गंभीर है और उन्हें नहीं लगता कि वह ज्यादा समय तक जीवित रह पाएंगे।

प्रेम नायक ने कहा कि आंदोलन का यह 24वां दिन है, जबकि वह पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा, “मेरी हालत गंभीर है और मेरी सेहत लगातार बिगड़ रही है। मुझे नहीं लगता कि मैं ज्यादा समय तक जिंदा रहूंगा।” इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया और कहा कि वह आखिरी सांस तक अपने राज्य और देश के लिए लड़ते रहेंगे।

सरकार पर बातचीत को लेकर सवाल

प्रेम नायक ने सरकार पर छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।

उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लेने और मामले को केवल मंत्रियों के स्तर तक सीमित न रखने की अपील की। नायक ने चेतावनी दी कि छात्रों में लगातार गुस्सा बढ़ रहा है और यह आंदोलन आगे और बड़ा रूप ले सकता है।

24वें दिन भी जारी है आंदोलन

JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और अन्य मांगों को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की CBI जांच समेत कई मांगें उठा रहे हैं।

आंदोलन के दौरान कई छात्र भूख हड़ताल पर हैं। छात्र नेताओं ने सरकार के साथ बातचीत की मांग करते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार लंबी होती भूख हड़ताल और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति ने सरकार के सामने चुनौती बढ़ा दी है। इससे पहले भी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की लंबे उपवास के दौरान तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में इलाज की खबर सामने आई थी।

अब प्रेम नायक के बयान के बाद छात्रों के आंदोलन और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत से इस गतिरोध का कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और उग्र होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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