बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत जमीन तैयार कर रहे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने राजनीतिक गठबंधनों और राज्य के भविष्य को लेकर अपनी नीति बिल्कुल साफ कर दी है। हाल ही में बांकीपुर उपचुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि केवल सत्ता हासिल करने के लिए किए गए राजनीतिक समझौते जनता का भला नहीं कर सकते।
2015 के चुनावों का दिया उदाहरण
प्रशांत किशोर ने साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे राजनीतिक दलों के बीच हुए तात्कालिक और अवसरवादी समझौते लंबे समय में जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। उन्होंने कहा कि ऐसे गठबंधन केवल चुनावी गणित साधने के लिए होते हैं, जबकि राज्य की जनता को बुनियादी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत होती है।
चुनावी जोड़-तोड़ से ऊपर बिहार का विकास
PK ने स्पष्ट किया कि जन सुराज का एजेंडा केवल चुनाव जीतना या सीटों का समीकरण बिठाना नहीं है, बल्कि बिहार की व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन लाना है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में मजबूत अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्थायी अवसर पैदा नहीं किए जाएंगे, तब तक बिहार का पिछड़ापन दूर नहीं हो सकता।
पलायन रोकने और बिहार को हब बनाने का संकल्प
अपने संबोधन और साक्षात्कारों में प्रशांत किशोर लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनका अंतिम लक्ष्य एक ऐसा आत्मनिर्भर बिहार का निर्माण करना है, जहाँ युवाओं को रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में धक्के न खाने पड़ें। इसके विपरीत, उनका सपना एक ऐसा स्वर्णिम बिहार बनाना है जहाँ देश के अन्य राज्यों के लोग रोजगार की तलाश में आएं।
