नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। जांच एजेंसियों को शुरुआत में जिस बड़े प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक होने का संदेह था, वहां से नहीं बल्कि खुद NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के लिए काम कर रहे विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) ने ही इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया।
अनुवाद और प्रूफरीडिंग के दौरान चुराए गए सवाल
CBI की जांच के अनुसार, पेपर की तैयारी के दौरान अनुवाद (Translation) और प्रूफरीडिंग (Proofreading) के लिए जिम्मेदार बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के एक्सपर्ट्स ने इस गोपनीयता को भंग किया।
- सीक्रेट सेशन में रटवाए गए सवाल: बॉटनी और केमिस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने चुनिंदा छात्रों को गुप्त (सीक्रेट) सेशंस में बुलाकर मौखिक रूप से सवाल और उनके जवाब रटवाए।
- फिजिक्स के पेपर की फोटो खींचकर भेजी: फिजिक्स एक्सपर्ट ने सवालों को हाथ से लिखकर कोचिंग संचालकों को दिया, जिसकी तस्वीरें खींचकर आगे लीक की गईं।
10 से 12 लाख रुपये में टेलीग्राम पर बिका पेपर
लीक किए गए प्रश्नों को डिजिटल पीडीएफ फाइलों में बदलकर टेलीग्राम (Telegram) जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेचा गया। कोचिंग संचालकों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए एक-एक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये तक वसूले गए।
फॉरेंसिक जांच और डिजिटल सबूतों से मिला सुराग
सीबीआई को इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुख्ता सबूत हासिल हुए हैं:
- हैंडराइटिंग मिलान: आरोपी विशेषज्ञों और कोचिंग संचालकों की लिखावट का फॉरेंसिक मिलान कराया गया है।
- डिजिटल और मनी ट्रेल: बैंक खातों में हुए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर वित्तीय लेनदेन के ठोस सबूत मिले हैं।
सीबीआई की इस चार्जशीट ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुरक्षा और गोपनीयता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi
