नई दिल्ली: कच्चे माल और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के बावजूद देश की प्रमुख स्टील कंपनियां अपनी लाभप्रदता (Profitability) बनाए रखने में सक्षम रहेंगी। Crisil Ratings की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मजबूत नकदी प्रवाह (Cash Accruals) और स्थिर वित्तीय स्थिति के चलते कंपनियां अपने विस्तार (Capex) की योजनाओं को बिना किसी बड़ी रुकावट के आगे बढ़ा सकेंगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती लागत का दबाव जरूर रहेगा, लेकिन घरेलू मांग, परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) और बेहतर उत्पाद मिश्रण (Value-added Products) के कारण प्रमुख स्टील निर्माता अपनी कमाई को संतुलित रखने में सफल रहेंगे। इससे उनकी क्रेडिट प्रोफाइल भी मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
Crisil Ratings का मानना है कि कंपनियों के पास पर्याप्त आंतरिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे वे नई उत्पादन क्षमता बढ़ाने, तकनीकी उन्नयन और अन्य पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) की योजनाओं को जारी रख सकेंगी। इससे आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों में सुधार होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और लागत पर नियंत्रण कायम रहता है, तो भारतीय स्टील उद्योग निकट भविष्य में भी स्थिर वृद्धि और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज कर सकता है।
