नई दिल्ली, 3 अगस्त: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। RSS नेता अतुल लिमये ने आरोप लगाया कि CJP लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने (Subversion of Democracy) की सोच पर काम कर रही है। वहीं, अभिजीत दीपके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए RSS पर जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
अतुल लिमये ने कहा कि CJP के नेतृत्व में हुए आंदोलन की कार्यप्रणाली को समझने की जरूरत है। उनके अनुसार, शुरुआत में आंदोलन एक विशेष मुद्दे तक सीमित था, लेकिन बाद में इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों, श्रमिक समूहों और नागरिक संगठनों की भागीदारी बढ़ी, जिसे उन्होंने “लोकतंत्र को लोकतांत्रिक तरीकों से कमजोर करने” की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का गंभीर अध्ययन किया जाना चाहिए।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि जनता के लोकतांत्रिक विरोध को राष्ट्रविरोधी या लोकतंत्र विरोधी बताना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनका संगठन छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाने का काम कर रहा है तथा शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रख रहा है। दीपके ने आरोप लगाया कि असहमति की आवाज़ों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
दोनों पक्षों के बयानों के बाद यह विवाद अब राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर RSS आंदोलन की रणनीति और उसके पीछे की विचारधारा पर सवाल उठा रहा है, वहीं CJP इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और जनभागीदारी का हिस्सा बता रहा है। इस घटनाक्रम ने देश में विरोध-प्रदर्शनों, लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक विमर्श को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)
